इस मंदिर में पानी से ही जलने लगता है दीपक, इस चमत्कार को देखने के लिए भक्तों की लगती है भीड़

“मानो तो भगवान, ना मानो तो पत्थर” आप लोगों ने यह कहावत तो सुनी ही होगी, वैसे देखा जाए तो आस्था पर विश्वास रखने वाले लोगों के लिए इस दुनिया में भगवान है परंतु जो लोग आस्था पर विश्वास नहीं रखते उनके लिए कोई भगवान नहीं है, उनके लिए भगवान की मूर्ति एक पत्थर के समान है, अक्सर लोग आस्था और अंधविश्वास के बीच में उलझे रहते हैं और हमेशा यही तर्क देते रहते हैं कि भगवान है या भगवान नहीं है? परंतु जब कोई ऐसी घटनाएं घटित हो जाती है या फिर आप इसको चमत्कार कह सकते हैं, जिनको देखने के बाद अक्सर लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर यह काम कैसे हो गया? तब अंधविश्वासी लोगों को भी इस पर विश्वास करना पड़ता है।

आज हम आपको कुछ ऐसे ही एक चमत्कार के बारे में बताने वाले हैं दरअसल, भारत का एक ऐसा मंदिर है जहां पर कुछ ऐसा चमत्कार देखने को मिलता है जो पूरे विश्व भर में एक अलग ही चमत्कार है, आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में काली सिंध नदी के किनारे नलखेड़ा गांव से करीब 15 किलोमीटर दूरी पर गड़िया गांव है और इस गड़िया गांव के समीप एक मंदिर मौजूद है, जो गड़ियाघाट वाली माता जी के नाम से दुनिया भर में मशहूर है, इस मंदिर में कुछ ऐसा चमत्कार होता है, जिसको देखकर हर कोई अपना सिर झुकाता है।

अब आपके मन में यह विचार आ रहा होगा कि आखिर इस मंदिर में ऐसा कौन-सा चमत्कार होता है जिसके आगे सभी लोग अपना शीश झुकाते हैं? तो चलिए आपको इस बारे में बताते हैं दरअसल, इस मंदिर में जो दीपक जलाया जाता है वह किसी घी से नहीं जलता है बल्कि पानी से यह दीपक जल उठता है, अब आप लोगों में से कई लोग ऐसे होंगे जो यह सोच रहे होंगे कि भला पानी तो आग बुझाने के काम आती है और यह दीपक पानी से कैसे जलने लगता है? परंतु जो जानकारी हम आपको दे रहे हैं यह बिल्कुल सत्य है, इस मंदिर के दीपक को जलाने के लिए किसी घी या फिर तेल की आवश्यकता नहीं पड़ती है बल्कि यह दीपक पानी से ही जलने लगता है।

इस मंदिर के अंदर यह चमत्कार आज से नहीं हो रहा है बल्कि यह चमत्कार पिछले 5 सालों से लोग देख रहे हैं, इस मंदिर के अंदर जो दीपक जलाया जाता है उसमें पानी का इस्तेमाल किया जाता है, इस मंदिर के अद्भुत चमत्कार को देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पर उपस्थित होते हैं, जब इस दीपक के अंदर पानी डाला जाता है तो यह पानी किसी तरल पदार्थ की तरह चिपचिपा हो जाता है, जिसकी वजह से यह लगातार जलता रहता है, माता जी का यह चमत्कार देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर इकट्ठे होते हैं।

अगर हम इस मंदिर के पुजारी के बारे में बताए तो यहां के पुजारी का ऐसा बताना है कि इस मंदिर के अंदर पहले तेल और घी से दीपक जलाया जाता था लेकिन आज से लगभग 5 वर्षों पहले माता रानी उनके सपने में आई थी और सपने में पुजारी से यह कहा था कि अब तुम घी या तेल की बजाय दीपक को पानी से जलाओ, तब पुजारी ने माता रानी के आदेशानुसार दूसरे दिन पानी से दीपक जलाया था, तब वह दीपक जल उठा था, तब से लेकर आज तक इस मंदिर के अंदर दीपक को कालीसिंध नदी के पानी से प्रज्वलित किया जाता है।

सच मायने में देखा जाए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं है और इस चमत्कार के आगे लोग दूर-दूर से आकर अपना सर झुकाते हैं, भला मंदिर का दिया पानी से जल उठता है? इस बात पर विश्वास करना कठिन है, परंतु इस मंदिर में ऐसा चमत्कार देखने को मिलता है।

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