गरीब मां-बाप के दो बेटे एक साथ बने IAS, इनके संघर्ष की कहानी जानकर आंखों में आ जाएंगे आंसू

गरीब मां-बाप के दो बेटे एक साथ बने IAS– मनुष्य की जिंदगी बहुत ही जटिल मानी गई है, मनुष्य अपने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए बहुत कुछ करता है और वैसे भी हर किसी व्यक्ति के लिए सफलता बहुत ही आवश्यक होती है, जिसको पाने के लिए व्यक्ति कोई भी कसर नहीं छोड़ता है, बहुत से लोग ऐसे हैं जो अच्छे काम करके अपने जीवन में तरक्की पाना चाहते हैं, वही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तरक्की पाने के लिए गलत रास्ता अपना लेते हैं, परंतु वास्तव में देखा जाए तो जो लोग अपने सच्चे दिल से और ठीक प्रकार से मेहनत करते हैं उनको भले ही देर से कामयाबी मिले परंतु उनको कामयाबी अवश्य हासिल होती है, आज हम आपको जो जानकारी देने वाले हैं उसको जानने के बाद आप भी इस बात पर यकीन करेंगे कि मेहनत से ही व्यक्ति सफल होता है।

दरअसल, हम आपको एक ऐसे घर के दो लड़कों के बारे में जानकारी बताने वाले हैं जिन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते पर अपने माता पिता का सपना पूरा किया है जी हां, इन दोनों लड़कों ने IAS ऑफिसर बनने का सपना पूरा कर दिखाया है, इन्होंने अपनी कामयाबी में अपनी आर्थिक स्थिति को भी बीच में नहीं आने दिया, जब इसका परिणाम मिला तो इन दोनों लड़कों के माता पिता की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा था, इनके माता-पिता को जो खुशी महसूस हुई है वह इनसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता, एक ही घर के दो भाइयों ने सिविल सर्विसेज में बहुत ही काबिले तारीफ सफलता प्राप्त की है, जब इस बात की जानकारी इन दोनों भाइयों के माता पिता को लगी तो इनके माता-पिता बहुत खुश हुए।

आज हम आपको जिस घर के दो भाइयों की कहानी के बारे में बता रहे हैं यह मामला राजस्थान के झुंझुनू शहर के मोदी रोड की है, जब सुभाष कुमावत और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी को इस बात का पता चला कि उनके दोनों बेटे एक साथ IAS ऑफिसर बन गए हैं तो उनके दिल को बहुत ही सुकून मिला, उनकी आंखों में खुशी की चमक अलग ही झलक रही थी, इतना ही नहीं उनको अपने दोनों बेटों की तरक्की से इतनी खुशी हुई कि उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे, उनके घर में खुशियों का माहौल बन गया और सभी एक दूसरे को बधाइयां देने में लगे हुए थे और वह सभी से बड़ी ही विनम्रता के साथ मिल रहे थे।

गरीब मां-बाप के दो बेटे एक साथ बने IAS, सिलाई और कढ़ाई का करते थे काम

आपको बता दें कि सुभाष सिलाई का काम करते हैं और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी बंधेज बांधने का कार्य करती है, उनके तीन बेटे हैं और तीन बेटों में से दो बेटे सिविल सर्विसेज में सिलेक्ट हो गए हैं, शुक्रवार के दिन UPSC के परिणाम की घोषणा में उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने 443 वी और अमित कुमावत ने 600 वी रैंक प्राप्त की है, इस परिवार में अभी तक किसी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिली थी परंतु इस खानदान की परंपरा इन दोनों भाइयों ने तोड़ दी है, पंकज कुमावत ने IIT दिल्ली से मैकेनिकल में B.Tech किया है और कुछ समय से नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में कार्य कर रहे थे और उनका छोटा भाई अमित कुमावत भी उसी के साथ काम करता था, अमित कुमावत ने भी IIT दिल्ली से B.Tech किया है और यह दोनों भाई दिल्ली में पढ़ाई करते थे और इन दोनों का एक ही सपना था कि वह देश की सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल करें और इन्होंने अपने माता पिता के सपने को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की है दिन रात इन्होंने बहुत मेहनत की थी।

आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से पढ़ाई करना आसान नहीं था

दरअसल, पंकज और अमित ने इस बात की जानकारी बताई थी कि हम जानते हैं कि हमको मां बाप ने किस प्रकार पढ़ाया है? हमारे लिए पढ़ाई करना तो सरल था परंतु हमारे मां-बाप के लिए हमको पढ़ाना बहुत ही कठिन था, हमारे मां-बाप ने हमेशा हमारे कपड़े, किताबें, हमारी फीस और सभी जरूरी चीजों का इंतजाम पहले से ही करके रखते थे और हमको किसी भी चीज का एहसास नहीं होने दिया था कि हमारे पास पैसों की कमी है, हमको पढ़ाने लिखाने में हमारे माता-पिता ने बहुत ही सहयोग दिया है और उन्होंने हमारे लिए बहुत कुछ किया है, हमारे मां-बाप रात भर जागकर सिलाई-कढ़ाई का काम किया करते थे, तब जाकर हमारी पढ़ाई के लिए रुपए इकट्ठे हो पाते थे, हमारे मां-बाप हमेशा से यही कहा करते थे कि तुमको पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनना है, पंकज ने यह बताया कि अगर इंसान को अपने जीवन में कुछ बनने की चाह है तो उसको कभी भी अपने जीवन की कमियों, परेशानियों को सामने नहीं लेकर आना चाहिए, तभी व्यक्ति अपने जीवन में कामयाब हो पाता है।