माता का 2000 साल पुराना मंदिर, जहां से कोई नहीं लौटता खाली हाथ

ऐसा कहा जाता है कि मां का दिल बहुत ही नाजुक होता है, और यह अपने बच्चों को कभी भी परेशानी में नहीं देख सकती, चाहे किसी भी परेशानी में व्यक्ति क्यों ना हो मां हमेशा अपने बच्चों की रक्षा के लिए जरूर आती है, वैसे देखा जाए तो देश भर में ऐसे बहुत से देवी मंदिर है जिनकी तरह-तरह की मान्यताओं और कहानियां विख्यात है, इन देवी मंदिरों के प्रति लोगों की अटूट आस्था और विश्वास देखने को मिलता है, जिसकी वजह से यह सभी भक्त माता के दर्शन के लिए जाते हैं, यह माता का प्रेम और भक्तों की अटूट आस्था ही है जिसकी वजह से सभी भक्त माता के दरबार में अपने आप खींचे चले आते हैं, और माता अपने बच्चों की सभी दुख परेशानियां पल भर में दूर कर देती है।

आप लोगों में से भी बहुत से लोग ऐसे होंगे जो आए दिन मंदिरों में दर्शन के लिए जाते होंगे, आप लोगों को इन मंदिरों में विराजमान भगवान के प्रति विश्वास है यही विश्वास आपको इन मंदिरों तक ले जाता है, सच मायने में देखा जाए तो आस्था पर विश्वास रखने वाले लोगों के लिए इस संसार में भगवान साक्षात विराजमान है, जो उनकी परेशानियों को दूर करते हैं परंतु जिन लोगों को भगवान पर भरोसा नहीं होता, उनके लिए तो यह सिर्फ पत्थर की मूरत के समान है, उनके लिए चमत्कार कुछ मायने नहीं रखता है, परंतु आप लोगों ने कभी महसूस किया होगा कि जब आप कभी परेशानी में हो और आपने अपने देवी-देवता का नाम लिया हो तो आपकी परेशानी अवश्य कम हो गई होगी, बस यही मन का विश्वास व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने में मदद करता है।

देश भर के प्रसिद्ध और चमत्कारिक मंदिरों में से आज हम आपको एक ऐसे देवी मां के मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिसका इतिहास काफी साल पुराना है, जितना इस मंदिर का इतिहास पुराना है उतना ही इस मंदिर की अलग-अलग मान्यताएं भी हैं, हम जिस मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं यह मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 75 किलोमीटर दूरी पर राजनांदगांव जिले में माता बम्लेश्वरी देवी का मंदिर मौजूद है यह मंदिर प्राकृतिक रूप से चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है, मां बम्लेश्वरी देवी का यह मंदिर डोंगरगढ़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है।

मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर की ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त माता के दरबार में आता है वह कभी भी निराश होकर नहीं जाता है, हर भक्तों की झोली माता रानी भरती है, इस मंदिर के अंदर भक्त अपनी आंखों में आंसू लेकर आता है परंतु यहां से अपने चेहरे पर हंसी लेकर वापस घर लौटता है, इस मंदिर के दर्शन करने के लिए हजार से अधिक सीढ़ियां चढ़ने पड़ती है तभी आप माता के दर्शन कर पाएंगे इस स्थान पर पहाड़ियों में माता बम्लेश्वरी देवी के दो मंदिर मौजूद है एक मंदिर पहाड़ी के नीचे स्थित है और दूसरा पहाड़ी के ऊपर स्थित है, जो भक्त माता के इस दरबार में अपनी मुराद मांगता है उसकी सभी मुरादें माता रानी पूरी करती हैं, इस मंदिर से बहुत सी मान्यताएं जुड़ी हैं।

इस मंदिर की मान्यता अनुसार ऐसा बताया जाता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को माता बगलामुखी ने सपने में दर्शन दिए थे, जिसके पश्चात राजनांदगांव जिले में डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर कामाख्या नगरी के राजा कामसेन ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी, दूसरी मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि राजा कामसेन और विक्रमादित्य के बीच युद्ध हुआ था, तब विक्रमादित्य के आवाहन पर उनके कुलदेवता उज्जैन के महाकाल कामसेन की सेना का विनाश करने लगे थे, इस विनाश को देखकर कामसेन ने अपनी कुलदेवी मां बम्लेश्वरी का आवाहन किया, तब माता युद्ध के मैदान में पहुंची थी, युद्ध के मैदान में माता बम्लेश्वरी देवी को देखकर महाकाल ने माता की शक्तियों को प्रणाम किया था, जिसके पश्चात दोनों देशों के बीच रजामंदी हो गई थी, तभी से माता बम्लेश्वरी इन पहाड़ियों पर विराजमान है।

ऐसा बताया जाता है कि कामाख्या नगरी पूरी तरह से नष्ट हो गई थी, तब माता की प्रतिमा इस पहाड़ी पर अपने आप प्रकट हुई थी, जिसके पश्चात यहां पर माता का मंदिर बना था, पहले माँ बम्लेश्वरी देवी के दर्शन के लिए पहाड़ों से होकर जाना पड़ता था परंतु अब यहां पर सीढ़ियां बनवा दी गई है, जिसके रास्ते से भक्त माता के दर्शन के लिए जाते हैं, अगर आपकी भी कोई अधूरी इच्छा रह गई है तो आप माता के दरबार में जा सकते हैं, आपकी सभी मनोकामनाएं माता अवश्य पूरी करेंगे।

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